गमगीन माहौल में सुपुर्दे ख़ाक हुए "ताजुश्शरिया" 127 देशों से आकर मुरीदैन ने की शिकरत

यूपी बरेली जनमत । "ताजुशशरिया" की उपाधि से सम्मानित बरेलवी मसलक के बड़े आलिम मुफ़्ती अख्तर रजा खां कादरी उर्फ "अजहरी मियां" को बरेली के मोहल्ला सौदागरान स्थित दरगाह आला हजरत के पास अजहरी गेस्ट हाउस में आज रविवार को सुपुर्दे खाक कर दिया गया । उनके जनाजे की नमाज इस्लामिया मैदान में उनके बेटे और शहर काजी असजद मियां ने अदा कराई । नमाज में बरेली के स्थानीय लोगों के साथ देश विदेश से बड़ी तादात में आए अकीदतमंदों ने शिरकत की । एक जानकारी के मुताबिक जनाज़े में तीस ज़िलों की पुलिस ने विधि-व्यवस्था को संभाला । सोशल मीडिया की मानें तो दो करोड़ से ज़्यादा की संख्या में लोगों ने जनाज़े की नमाज़ में हिस्सा लिया ।
भारत के लगभग हर राज्य से ताजुशशरिया के मुरीद व आम मुसलमान शामिल हुए। इसके अलावा 127 देशों से भी लोग आकर जनाज़े में शामिल हुए । ताजुशशरिया अज़हरी मियां के इन्तेकाल पर तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एरदोगान ने भी ग़मज़दा होकर अपनी अक़ीदत का इज़हार रुंधे हुए गले से किया तो  दावत ए इस्लामी के अमीर हज़रत मौलाना इल्यास अत्तार क़ादरी ने भी गम का इज़हार किया । मारूफ और मशहूर पाकिस्तान के नातखां हज़रत ओवैस रज़ा क़ादरी ने भी अपने ग़म का इज़हार करते हुए हुज़ूर अज़हरी मियां के मुरीदीन को सब्र करने के लिए दुआ की । सियासत की दुनिया से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, सपा नेता आजम खान, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने अजहरी मियां के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया है।
बता दें कि ताजुशशरिया को शरीयत का ताज माना जाता है (था), आपने दुनिया में अनेक इस्लामी, दुनियावी, समाजी मुद्दे पर क़ुरान, हदीस और शरीयत की रोशनी में फतवे दिए जिससे पूरी दुनिया को इस्लाम के सूफी परम्परा का एक सही रुख नज़र आया । आपको जानकर हैरानी होगी हिंदुस्तान की सियासत के कई रहनुमाओं ने उनको अनेकानेक लालच दिए लेकिन उन्होंने हमेशा इनकार किया, बल्कि वे किसी भी राजनेता से मिलने तक पसंद नहीं करते थे।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फ़िल्म स्टार संजय दत्त, अमर सिंह, राहुल गांधी तक को मायूस होकर लौटना पड़ा था जब ताजुशशरिया ने उनसे मिलने से मना कर दिया था।
बताते हैं कि कई बार राजनेताओं ने उन्हें विधान परिषद, राज्यसभा और अन्य सियासी पद लेने का आग्रह किया लेकिन ताजुशशरिया ने साफ मना कर दिया । दरअसल इन सबके पीछे उनकी तरबियत और इस्लामी तालीम का ही नतीजा था जो वो किसी भी तरह के सियासी जाल में नही फंसे बल्कि तस्सवुफ और इंसानियत के लिए ज़िन्दगी भर काम करते रहे ।
हज़रत ताजुश्शरिया के नमाज़े जनाज़े में खानदान से दरगाह प्रमुख हज़रत सुब्हानी मियां, सज्जादानाशीन हज़रत अहसन मियां, हज़रत मन्नानी मियां, जनाब सलमान हसन क़ादरी, हज़रत तौसीफ मियां, हज़रत अंजुम मियां, हज़रत तस्लीम मियां, दामाद ताजुशशरिया मुफ़्ती हज़रत सलमान मियां (छत्तीसगढ़), हज़रत फरहान मियां (सऊदी अरब), हाजी मंसूब अली साहब, हाजी बुरहान अली साहब, मुफ़्ती आशिक़ हुसैन, हज़रत सिराज़ मियां, हज़रत हस्सान मियां, हज़रत उमर मिया, मौलाना अदनान मियां, जनाब मौज़ज़्म रज़ा, हज़रत अनस मियां, हुस्साम मियां, हम्माम मियां, सय्यद आसिफ मियां मोहतिशिम रज़ा, अल्लामा ज़िया उल मुस्तफ़ा, बगदाद शरीफ से मुफ़्ती गुलाम मुस्तफ़ा, साउथ अफ्रीका के मुफ़्ती आफताब क़ासिम, ओमान से मौलाना सलमान फरीदी, मारीशस से हाफिज़ इस्लाम अजहरी, बांग्लादेश से हाजी अमीन, अरब, दुबई, नेपाल, अमेरिका के उलेमा के अलावा कारी मुर्तज़ा,मुफ़्ती नाज़िम अली, मुफ़्ती अफजाल रज़वी, मुफ़्ती अकिल रज़वी, मुफ़्ती सलीम नुरी, मुफ्ती अफज़ाल रज़वी, मुफ़्ती खुर्शीद आलम, फरमान हसन खान, मोइन खान, सय्यद कैफ़ी, आबिद खान, अतीक अहमद, सय्यद अजीमुद्दीन, शाहिद नुरी, अजमल नुरी, ताज खान, हाजी अब्बास, मोहसिन रज़ा, नासिर कुरैशी, परवेज़ नुरी, यूनुस गद्दी, ताहिर अल्वी, डॉक्टर नफीस खान,अफज़ाल बेग, नदीम कुरैशी,सय्यद सैफी, इशरत नुरी, आसिफ रज़ा, मुजाहिद बेग, कामरान खान, नावेद खान, हाजी जावेद खान, तहसीन रज़ा आदि लोग मौजूद रहे ।

कब्र मुबारक हज़रत ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रज़ा खाँ : जनमत एक्सप्रेस (9997667313)




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