हमें भी चाहिए आजादी

एस०शाहिद अली !!
स्वतंत्र पत्रकार ~ महज वो दो दिन काफी नहीं थे दिल्ली में अपने दोस्तो से मिलने के लिए । सारा दिन घूमने और मिलने मिलाने के बावजूद कई दोस्तो की शिकायात है कि मैं उनसे मिला नहीं । घर आने के लिए बस स्टॉप पर जाते समय एक Classmate का मैसेज आया, जब उसे पता चला कि मैं देहली में हूँ और घर वापस जा रहा हूँ तो वो मिलने के लिए बस स्टॉप पर ही आ गया । लंबे अरसे के बाद मिलना हुआ था मिलते ही एक दूसरे ने गले मिलकर महोब्बत की झप्पी दे डाली और बहुत सारी बातें शुरू हो गई । बातों बातों में जब मैंने उससे Job के बारे में पूछा तो उसके चेहरे पर मायूसी आ गई । उसने Tourist क्षेत्र में अच्छा Diploma कर रखा है । उसकी मायूसी का कारण जानने के बाद भ्रष्टाचार और असहिष्णुता जैसे शब्द कम पडने लगे भारतीय सिस्टम के सम्मान में बोलने के लिए ।
उसने बताया कि Companies में इंटरव्यू Open होने के बावजूद मुसलमान होने के कारण उसे मना कर दिया जाता है । ये सुनते ही खून में गुस्से का उबाल आकर रह गया । तमाम सियासी वादे, कोर्ट के आदेश और संवैधानिक हक, कहाँ हैं ये सब ? क्या हो क्या रहा है मेरे देश में ? कहाँ है सबका साथ - सबका विकास ?
भाजपा आदि सियासी पार्टियों के बारे में लिखने पर मुझसे कई लोग सवाल करते हैं । कुछ साथी तो मुझे आलोचक भी कहने लगे हैं । दोस्तो मैं भाजपा, कॉग्रेस, सपा या बसपा से मतलब नहीं रखता मुझे मतलब है अपने देश के सिस्टम से । सरकार चाहे जिसकी हो जब तक देश का सिस्टम नहीं सुधरेगा तब तक मैं तो क्या मेरे जैसे लाखों हजारों लोग इस घटिया और पक्षपात बाले सिस्टम के खिलाफ लिखते रहेंगे...!!!

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