सांप्रदायिक सौहार्द का आईना हैं ‘मामू’ 26वीं बार कलाई पर बंधवाई राखी

बदायूँ जनमत। देश और प्रदेश में भले ही फिरकापस्त ताकतें देश को सांम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का प्रयास कर रहीं हों। मगर मुस्लिम समाज में ऐसे लोग भी है, जो दोनों समुदायों के लोगों के लिए साम्प्रदायिक सदभाव का आईना हैं। साम्प्रदायिक सदभाव की मिशाल बने व्यक्ति ने हिन्दू बहिन से इस बार भाई-बहन के पावन पर्व रक्षाबन्धन पर 26वीं बार राखी बंधवाई है। यही नहीं हिन्दू-मुस्लिम के इन दोनों परिवारों में ऐसी कोई शादी विवाह नहीं होते, जिनमें भाई, बहन के रिश्ते की रश्में पूरी न होती होें, कभी बहन भाई के घर तो कभी भाई बहन के घर। मुस्लिम परिवार में जन्मे ऐसा नहीं कि इस पर दबाव पड़ा हो, मगर जाति धर्म की दीबार को दर किनार कर पार किया तो इन्हीं में एक हैं ककराला के हामिद खां राजपूत।
ककराला के वार्ड0 न0 20 के निवासी हामिद खां राजपूत उर्फ मामू आज भाई बहन के प्यार का प्रतीक रक्षा बन्धन पर्व अपनी धर्म बहन वेदामऊ विद्यापीठ के संस्थापक आचार्य वेदव्रत आर्य की धर्म पत्नी रामबेटी आर्या के यहां राखी बंधवाने पहुंचे उन्होंने इस साल 26वीं बार अपनी धर्म बहन से तिलक करवाया, राखी बंधबाई और बाद में बहन को उपहार भी दिया। मामू ने कहा कि यह रिश्ता आज का नहीं है। दो दशक होने को हैं। वह बहन के यहां हर एक शादियों मंे भाई की सभी रस्मे पूरी करते हैं। बहन भी ऐसी कि इस धर्म भाई के हाथ में सबसे पहले राखी बांधती है।
बहन रामबेटी से राखी बंधवाते हुए हामिद अली खां

मामू बताते हैं कि शुरूआत में माथे पर तिलक, कलाई में राखी देख उनके समुदाय के लोग विरोध करते थे। मगर उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। कहते हैं कि यदि भाईचारा कायम रखना है तो हमें एक-दूसरे के त्योहारों में शरीक होकर मेल मिलाप बढ़ाना होगा। रही बात भाई बहन की तो वह जब तक जीवित हैं, अटूट रिश्ता अनवरत चलेगा। भाई को दिक्कत तो बहन सहायता की सीढ़ी बनती है और बहन की पुकार मिलती तो भाई आधी रात को हाजिर है। कहा कि भाईचारे को और मजबूत करने की जरूरत है दकियानूसी मिटाने को आगे आना ही होगा।

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